रविवार, 28 जून 2009

वे

मैं अब
छोटा नहीं हूँ,
हर निर्णय पर
तुम्हारी मुहर
ज़रूरी तो नहीं !

चल सकता हूँ
स्वयं,
अकेले,
सहारे की ज़रूरत
अब नहीं ।

लेकिन आज क्यों
बेसहारा हूँ,
अकेले हो गया हूँ ?

अचानक
बड़ा हो गया हूँ ??

पिता नहीं रहे ।
[] राकेश ' सोऽहं '

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