पिछले दिनों मेरा मित्र मुसीबत में था । उसने मुझे याद किया लेकिन मै नहीं पहुँचा ।
आज सोचता हूँ उससे मिल आऊंगा । फ़िर तैयार होकर ।
स्कूटर की किक लगते हुए, उस दिन न पहुँच पाने का बहाना सोचने लगा ।
० राकेश 'सोहम'
बुधवार, 26 अगस्त 2009
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वाह! अदभुत रचना।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहद प्रभावशाली तीन पंक्तियां...
प्रत्युत्तर देंहटाएंइतनी सी लघुकथा में गजब की उलटबासी दर्शा दी आपने...