मंगलवार, 3 नवम्बर 2009

छपी हुई रचना

प्रेम-पत्र में
प्रेमिका की मंगनी
अन्यत्र
हो जाने की ख़बर
और अपने पास
बुला लेने की
विनती पढ़कर
प्रेमी सम्पादक रोया ।

पत्त्रोत्तर में
अभिवादन व खेद सहित
शब्दों को
कुछ यों पिरोया -

'हे प्रिये
अब तुम
मेरे लिए
मातृ एक सपना हो,
मैं तुम्हें
कैसे स्वीकारूँ
तुम तो एक
छपी हुई रचना हो !'
००००००००
राकेश 'सोहम'

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