
होली के रंगों से
गोरी सजी आज,
गाल गुलाबी हुए
होंठ भए लाल ।
चुनरिया, घाघरिया
खूब रंगी रंग,
अंगों पे रंग सजे
रंग भए रंग ।
आँखें भी प्यारी लगीं
नीली सी आज,
वे भी तो रीती नहीं
रंगों से आज ।
[] राकेश 'सोहम'
राकेश 'सोहम' की रचनाएँ, लघुकथाएं, व्यंग्य और कवितायेँ
बहुत दिनों बाद दिखे बंदापरवर...
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