कल था
महिला दिवस पर
अखबारों में
विशेष,
दिवस गया
आज फिर
महिला
रह गयी
शेष !
आज से
उस कल तक
अखबारों में
बिखरेगी -
महिला, महिला
और महिला ।
महिला का शोषण,
महिला का कुपोषण ।
महिला पर अत्याचार,
महिला का बलात्कार ।
महिला का आकर्षण,
महिला का चीरहरण ।
महिला का दमन,
महिला का दहन ।
चटखारों में होगी
व्यथा,
बस और केवल बस
निर्बला होने की
कथा !!!
[] राकेश 'सोहम'

सतही पर जरूरी बात...
प्रत्युत्तर देंहटाएं